Ehsaas Hindi Kavita by Amar Deep Singh

एहसास: कविता

आज सुबह सेअज़ीब सा एहसास है ऐसा लग रहा है कि मैं गंगा में तैर रहा हूँ हरिद्वार वाली गंगा नहीं,इलाहाबाद वाली जो शांत है बस बहे चली जा रही है और मैं तट की हलचल से कोसो दूर उल्टा लेटन जाने कब से आसमान को निहार रहा हूँ एकटक   अकेले एक लाश की तरह –  एकदम मौन, एकदम स्थिर ।।   Click here to read all my poems […]

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चांद पर एक और कविता

चांद के साथ: कविता

ऐ चांद !तुझ पर कितनी कविताएं लिखी गई हैंऔर कितने फसाने गढ़े गए हैं,आजमैं ना कुछ लिखूंगाना कुछ कहूंगा बससाथ रहेंगे,थोड़ी देर बैठेंगेकुछ बात नहीं करेंगेचुपचाप   रात की रफ्तार से परेअपनी खामोशी में वक़्त कुछ गुजारेंगे, वह भीजब तक मन करेगातब तक।     Image Ref – Please Click Here. Click here to read all my poems

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फितरत - एक कविता है उनके ज़ज़्बे की जो कभी हार नहीं मानते। उनके लिए जिनकी आदत ही होती है अंतिम दम तक लड़ने की, संघर्ष करने की।

फितरत: कविता

ऐसा नहीं कि मुद्दा समझ नहीं आता,या बदलते हालात का इल्म नहीं है मुझे ।   पर हार मान लूँ ये फितरत में नहीं, और यूँ ही जाने दूँ ये मेरी ख़सलत नहीं ।   ना हर्ज़ मुझे मिटटी फांकने काऔर ना ही धूल खाने का है,एक दफा तो ज़ोर आजमाइश करूंगा ही,अंजाम चाहे जो भी हो। Image Ref – Please Click Here. […]

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ख्वाबों की चादर - कविता उन सबके लिए है जिनके अरमान और ख़्वाब कहीं बाजार में बिक गए। कब उनके ख्वाबों का मोल लगा उन्हें पता ही नहीं चला।

ख्वाबों की चादर: कविता

कुछ ख्वाबों की कत्तरें जोड़ करमैंने एक चादर बनाई थी,सोचा थाकि फुरसत के लम्हों मेंरूह को आराम दूंगा। पर पसंद आ गई वो लोगों कोअरमानों के बाज़ार में और उस दिन से मैंचादरों का दुकानदार बन गया, अब पैसा बहुत हैऔर चादरें भी भरी पड़ी है,कुछ नहीं है तो,बस चैन के दो लम्हे,थोड़ी सी फुरसतऔर […]

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